नई दिल्ली। लोकसभा में वक्फ संशोधन के नये विधेयक पर बुधवार को 12 घंटे तक लगातार मैराथन चर्चा के बाद इसे पारित कर दिया गया। नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने बहुमत से वक्फ संशोधन बिल को पास करा लिया है। रात के 12 बजकर 19 मिनट पर संशोधन बिल पर वोटिंग शुरू हुई।
वक्फ बिल के समर्थन 296 जबकि विरोध में 235 नंबर के आंकड़े थे। हालांकि बाद में संशोधन पर विपक्ष ने डिवीजन की मांग की। बहुमत के लिए 272 का आंकड़ा चाहिए था। बिल संशोधन पक्ष में 288 वोट जबकि विपक्ष में 232 वोट पड़े। इस तरह बहुमत वक्फ संशोधन बिल के प्रस्ताव के पक्ष में आया।
इस तरह सरकार का संशोधन मंजूर हो गया जबकि विपक्ष के 100 से ज्यादा संशोधन गिर गए। सरकार के इस संशोधन से विपक्ष की तुष्टिकरण नीति को गहरा आघात पहुंचा।
वहीं, इस बिल के पास होने से विपक्षी दलों की इस नेरेटिव को भी धक्का पहुंचा कि एनडीए सरकार के गठबंधन दलों में सहमति नहीं है। अब गुरुवार को राज्यसभा में वक्फ विधेयक को पेश किया जाएगा।
क्या है वक्फ संशोधन बिल?
अल्पसंख्यक समुदाय की तरफ से विरोध प्रदर्शन जारी है। इसका असर ईद को लेकर होने वाली नमाजों में भी देखने को मिला। जहां लोग विरोध में काली पट्टी पहने नजर आए। इसी सुगबुगाहट के बीच वक़्फ़ की संपत्ति से जुड़े इस बिल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। ऐसे में हम वक्फ संशोधन बिल से जुड़ी जानकारी लेकर आपके सामने पेश हुए है। पूरा डाटा अल्पसंख्यक मंत्रालय की तरफ से दिया गया है।
हमारा उद्देश्य सरकार की मनोदशा को लेकर है, कि आखिर सरकार इस बिल को क्यों लाना चाहती है।
पहले पृष्ठभूमि समझते हैं?
8 अगस्त, 2024 को दो विधेयक: (१) वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 और (२) मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 , लोकसभा में पेश किए गए थे।
इनका उद्देश्य वक्फ बोर्ड के काम को सुव्यवस्थित करना और वक्फ संपत्तियों का सही तरह से मैनेजमेंट करना है।
वक़्फ़ संशोधन विधेयक क्या है?
इसका उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करना है। इससे वक्फ संपत्तियों के विनियमन और प्रबंधन में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
संशोधन विधेयक का उद्देश्य भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में सुधार करना है। इसके अलावा पिछले अधिनियम में जो कमियां थीं, उन्हें भी दूर करना है। कुल उद्देश्य सरकार का कि इन सुधारों से वक़्फ़ बोर्ड की दक्षता बढ़े। इनमें अधिनियम का नाम बदलने, वक़्फ़ की परिभाषाओं को स्पष्ट करने, पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार करने और वक़्फ़ से जुड़े रिकॉर्ड्स के मैनेजमेंट में तकनीकी भूमिका बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण बदलाव हैं।
मुसलमान वक़्फ़ निरसन विधेयक 2024 क्या है?
अब बात मुसलमान वक़्फ़ निरसन विधेयक 2024 की। इसका उद्देश्य मुसलमान वक़्फ़ अधिनियम 1923 को निरस्त करना है। ये औपनिवेशिक युग का कानून है। जो संपत्तियों के प्रबंधन के लिए पुराना और अपर्याप्त हो गया है। इसके द्वारा सरकार संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में एकरूपता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहती है।
बता दें, वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया है।
'वक्फ' का मतलब क्या है?
यह एक इस्लामिक कानून है। इसके तहत धार्मिक उद्देश्यों के तहत संपत्तियों को संदर्भित किया जाता है। इन संपतियों का उपयोग या बिक्री नहीं की जा सकती है। इसका सीधे तौर पर मतलब होता है कि संपत्ति का स्वामित्व अब वक़्फ़ करने वाले व्यक्ति से छीन लिया गया है। यह संपत्ति अल्लाह द्वारा हस्तांतरित कर ली गई है। 'वाकिफ' वह व्यक्ति होता है जो लाभार्थी के लिए वक्फ बनाता है। इन संपत्तियों के रख रखाव की जिम्मेदारी निभाने के लिए भौतिक रूप से मुतवल्ली की नियुक्ति की जाती है। एक बार कोई संपत्ति वक़्फ़ हो जाती है तो उसे परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।
कहां से आया वक़्फ़ का कांसेप्ट?
देश में वक्फ का इतिहास दिल्ली सल्तनत के समय से जुड़ा हुआ है। उस वक्त के सुल्तान मुइज़ुद्दीन सैम ग़ौर ने मुल्तान की जामा मस्जिद के पक्ष में दो गाँव समर्पित किए। इसका प्रशासन शेखुल इस्लाम को सौंप दिया। जैसे-जैसे दिल्ली सल्तनत और बाद में इस्लामी राजवंश भारत में फले-फूले, भारत में वक्फ संपत्तियों की संख्या बढ़ती गई।
19वीं सदी के आखिर में भारत में वक्फ को खत्म करने का मामला तब उठाया गया था जब ब्रिटिश राज के दिनों में वक्फ संपत्ति को लेकर एक विवाद लंदन की प्रिवी काउंसिल में पहुंचा था।
इस मामले की सुनवाई करने वाले चार ब्रिटिश जजों ने वक्फ को अमान्य घोषित कर दिया। इस फैसले को भारत में स्वीकार नहीं किया गया।
1913 के मुसलमान वक्फ वैधीकरण अधिनियम ने भारत में वक्फ संस्था को बचा लिया। तब से यह अधिनियम देश में जारी है।
आजादी के बाद और मजबूत होता गया वक़्फ़ अधिनियम
वक्फ अधिनियम, 1954: इसके तहत वक्फ को और मजबूत किया गया है। सरकार ने 1964 में वक्फ अधिनियम 1954 के तहत एक वैधानिक निकाय, सेंट्रल वक्फ काउंसिल ऑफ इंडिया की स्थापना की।
यह काउंसिल विभिन्न राज्य के वक्फ बोर्डों के काम की देखरेख करता है। इन्हें वक्फ अधिनियम, 1954 की धारा 9(1) के प्रावधानों के तहत स्थापित किया गया था।
वक्फ अधिनियम, 1995 - वक्फ अधिनियम को 1995 में मुसलमानों के लिए और भी अधिक अनुकूल बनाया गया।
इसे एक प्रमुख कानून बना दिया। वक्फ अधिनियम, 1995 को भारत में वक्फ संपत्तियों (धार्मिक बंदोबस्ती) के प्रशासन को संचालित करने के लिए अधिनियमित किया गया था।
यह वक्फ परिषद, राज्य वक्फ बोर्डों और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की शक्ति और कार्यों और मुतवल्ली के कर्तव्यों का भी प्रावधान करता है।
यह अधिनियम वक्फ न्यायाधिकरण की शक्ति और प्रतिबंधों का भी वर्णन करता है। जो अपने अधिकार क्षेत्र के तहत एक सिविल कोर्ट के बदले में कार्य करता है।
वक्फ न्यायाधिकरण को एक सिविल कोर्ट माना जाता है और उन्हें सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत एक सिविल कोर्ट द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी शक्तियों और कार्यों का प्रयोग करना आवश्यक है।
न्यायाधिकरण का निर्णय अंतिम और पक्षों पर बाध्यकारी होगा। कोई भी मुकदमा या कानूनी कार्यवाही किसी भी सिविल कोर्ट के अधीन नहीं होगी। इस प्रकार, वक्फ न्यायाधिकरण के निर्णय किसी भी सिविल कोर्ट से ऊपर हैं।
2013 में संशोधन: वक्फ प्रबंधन को और अधिक कुशल और पारदर्शी बनाने के लिए वर्ष 2013 में अधिनियम के कुछ प्रावधानों में संशोधन किया गया था।
इस्लामिक देशों में वक्फ की संपत्तियां हैं?
नहीं, सभी इस्लामिक देशों में वक्फ संपत्तियां नहीं हैं। तुर्की, लीबिया, मिस्र, सूडान, लेबनान, सीरिया, जॉर्डन, ट्यूनीशिया और इराक जैसे इस्लामिक देशों में वक्फ नहीं हैं।
हालांकि, भारत में, न केवल वक्फ बोर्ड सबसे बड़े शहरी भूस्वामी हैं, बल्कि उनके पास कानूनी रूप से उनकी सुरक्षा करने वाला एक अधिनियम भी है।
वक्फ बोर्ड कितनी संपत्तियों पर नियंत्रण रखता है?
वक्फ बोर्ड वर्तमान में भारत भर में 9.4 लाख एकड़ में फैली 8.7 लाख संपत्तियों को नियंत्रित करता है, इसका अनुमानित मूल्य 1.2 लाख करोड़ रुपये है।
भारत में दुनिया की सबसे बड़ी वक्फ होल्डिंग है। इसके अलावा, सशस्त्र बलों और भारतीय रेलवे के बाद वक्फ बोर्ड भारत में सबसे बड़ा भूस्वामी है ।
वक्फ बोर्ड के अंतर्गत 356,051 वक्फ एस्टेट पंजीकृत हैं। वक्फ बोर्ड के अंतर्गत 872,328 अचल संपत्तियां पंजीकृत हैं। वक्फ बोर्ड के अंतर्गत 16,713 चल संपत्तियां पंजीकृत हैं। वक्फ बोर्ड के पास अब तक 330000 डिजिटाइज्ड रिकॉर्ड हैं।
वक्फ प्रशासन के पास कितने मामले लंबित हैं?
मंत्रालय ने न्यायाधिकरणों के कामकाज का विश्लेषण किया है। इसके तहत 40,951 मामले लंबित हैं। इनमें से 9942 मामले मुस्लिम समुदाय द्वारा वक्फ का प्रबंधन करने वाली संस्थाओं के खिलाफ दायर किए गए हैं।
सच्चर समिति की सिफारिशें?
इन संपत्तियों का सही उपयोग किया जाए तो वे 10% रेवेन्यू उत्पन्न कर सकती हैं, जो हर साल लगभग 12000 करोड़ रुपये है। इसको लेकर समिति ने 2006 में एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि मुतवल्लियों के विनियमन और कार्यप्रणाली की आवश्यकता, अभिलेखों का कुशल प्रबंधन वक्फ के प्रबंधन में गैर-मुस्लिम तकनीकी विशेषज्ञता को शामिल करना,वक्फ बोर्डों को प्रशासनिक रूप से मजबूत करने के लिए संगठनात्मक सुधार, केंद्रीय वक्फ बोर्ड (सीडब्ल्यूसी) और प्रत्येक राज्य वक्फ बोर्ड (एसडब्ल्यूबी) में दो महिला सदस्यों को शामिल करना।सीडब्ल्यूसी/एसडब्ल्यूबी में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति,वक्फ को वित्तीय लेखा परीक्षा योजना के अंतर्गत लाया जाए।
प्रश्न 18. संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशें क्या हैं?
वक्फ पर संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट मेंवक्फ बोर्डों की संरचना में सुधार,एसडब्लूबी के लिए सीईओ के रूप में वरिष्ठ स्तर का अधिकारी उपलब्ध कराना, वक़्फ़ संपत्तियों के अनधिकृत हस्तांतरण के लिए कड़ी कार्रवाई,यदि मुतवल्ली अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहता है तो उसे कठोर दंड दिया जाएगा।
इसने कुछ मामलों को रिट क्षेत्राधिकार के अंतर्गत माननीय उच्च न्यायालय में ले जाने की भी सिफारिश की है।
वक्फ बोर्डों का कम्प्यूटरीकरण और सीडब्ल्यूसी में शिया समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व करना है।